कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) के दिल्ली एनसीआर संयोजक सुशील कुमार जैन ने कहां है कि वैश्विक महामारी कोरोना ने व्यापारियों की रीढ़ तोड़ दी हैl इस संक्रमण काल में व्यापारियों को कोरोना लोन देने की व्यवस्था होनी चाहिए यह व्यवस्था व्यापारियों को बल देने का काम करेगी l उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के "लोकल के लिए वोकल " के स्पष्ट आह्वान को व्यापारियों के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है क्योंकि वे देश के 130 करोड़ लोगों के लिए पहला बिंदु संपर्क हैं।
अपनी नियमित दैनिक वीडियो कॉन्फ़्रेन्स में विभिन्न राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं से परामर्श करने के बाद कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) ने पहले ही वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण को उन चिंताओं और मुद्दों से अवगत कराया है जिनके लिए व्यापारियों को राहत पैकेज का इंतजार है।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि राहत पैकिज से सम्बन्धित व्यापारियों की इच्छा सूची में उनके कर्मचारियों को वेतन के भुगतान के लिए वित्तीय सहायता, नकद सहित बैंकों से व्यापारियों द्वारा लिए गए ऋण पर लॉकडाउन की अवधि के लिए ब्याज की अदायगी को माफ़ करना , मुद्रा ऋण में अधिकतम ऋण सीमा को रु 10 लाख से रु 25 लाख तक का विस्तार, ईएसआई और भविष्य निधि में नियोक्ता के योगदान की छूट शामिल हैं । कैट ने सरकार को ईएसआई फंड में जिसमें लगभग 91000 करोड़ रुपये का फंड है और श्रम कल्याण निधि में लेबर वेलफैएर फंड है में से सरकार व्यापारियों के अंश का भुगतान लॉक डाउन की अवधि से लेकर छह महीने तक के लिए दे ।
श्री सुशील कुमार जैन ने यह भी मांग की कि सरकार को बैंकों को निर्देश दे की व्यापारियों को एक विशेष करोना ऋण दे जिस पर 3% ब्याज दर हो और वो 60 समान किश्तों में भुगतान हो और पहली किश्त जनवरी 2021 से शुरू हो । इस ऋण को किसी भी ऋण के खिलाफ समायोजित नहीं किया जाना चाहिए और व्यापारियों को कार्यशील पूंजी के रूप में प्रदान किया जाना चाहिए। कैट ने यह भी मांग की है कि आरबीआई की व्यापार प्राप्य योजना के तहत, एक वर्ष के लिए खरीदारों के टर्नओवर की सीमा को 300 करोड़ रुपये से घटाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया जाना चाहिए, जिससे व्यापारियों को उनकी स्कीम के तहत मिलने वाली बिलों में छूट मिल सके।
श्री सुशील कुमार जैन ने आगे कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और प्रोत्साहित करने के लिए, डिजिटल भुगतान लेनदेन पर लगाए गए बैंक शुल्क को व्यापारियों और उपभोक्ताओं से माफ कर दिया जाना चाहिए और सरकार को उक्त राशि को सीधे बैंकों को सब्सिडी देनी चाहिए ।
भारत के खुदरा व्यापार में लगभग 7 करोड़ व्यापारी हैं जो लगभग 40 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और लगभग 50 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करते हैl