कोरोना प्रकोप के बीच महाभारत का प्रसारण पूरा हुआ। एक ही परिवार के दो पाटों के बीच जमकर जनता पीसी l 18 दिनों तक चले युद्ध में दोनों ओर से बड़े-बड़े सूरमा का खात्मा हुआ l
यदि गंभीरता से समझें तो महाभारत के आखिरी एपिसोड में कई संदेश प्राप्त हुए। राज्याभिषेक के बाद युधिष्ठिर ने कहा:- "राजा को कभी यह नहीं सोचना चाहिए की प्रजा ने उसके लिए क्या किया ? उसे यह सोचना चाहिए कि उसने प्रजा के लिए क्या किया। राजा प्रजा के लिए होता है, ना की प्रजा राजा के लिए।"
शरसैया पर लेटे भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्यागने से पहले कहा:- "देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति के लिए कभी भी राजा को इतिहास को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। इतिहास ने अपना काम किया, वर्तमान को अपना काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी शासन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उस राज्य में जनता कितनी सुरक्षित हैं। और उस का कितना सम्मान है।"
आखिर में सूत्रधार समय ने भी एक संदेश दिया। उसने कहा:- "जो अन्याय, अनाचार, अहंकार महाभारत में था वह आज भी है। हमें आज के धृतराष्ट्र, दुर्योधन और दुशासनों का साहस से मुकाबला करना चाहिए।"
अपने विवेक का इस्तेमाल कीजिएl ध्यान से मौजूदा हालातों को समझिए और जब सही समय आए तो खुद से निर्णय लीजिए l